कश्मीरी हिन्दुओं के हितों के लिए दृढ़ संकल्पित – सनातन मिशन

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सनातन मिशन ने कश्मीरी हिन्दुओं द्वारा कश्मीर घाटी में उनके द्वारा छोड़ी गई उनकी तमाम संपत्ति उन्हें वापिस दिलवाने के लिए और उनके उचित पुनर्स्थापन की दिशा में कार्य करने का संकल्प लेकर एक राष्ट्रव्यापी अभियान शुरू किया है।

सनातन मिशन की स्थापना अग्रणी पत्रकार ललित शास्त्री ने की है। उनके अनुयायी श्रद्धा से उन्हें गुरु ललितेंद्र कहते हैं। एक पत्रकार के रूप में, उन्होंने कश्मीरी पंडितों के अधिकारों के बारे में और अलगाववादियों, और आतंकवादियों के खिलाफ, जिन्होंने कश्मीर में आतंक मचा रखा है, बहुत अधिक लिखा है।

गुरु ललितेंद्र का जम्मू-कश्मीर से पुराना और नजदीकी रिश्ता है। आपके पिताजी, स्वर्गीय अनंत मराल शास्त्री, ने 20 वीं शताब्दी के 70 के दशक मे जम्मू मे राष्ट्रीय संस्कृत संस्थान की स्थापना की थी

पिछली जनगणना के आधार पर 2011 तक कश्मीर घाटी  मे , अनुमानित 2,700-3,400 कश्मीरी  पंडित  थे। भारत सरकार के अनुसार, 60,000 से अधिक परिवारों को कश्मीरी प्रवासियों के रूप में पंजीकृत किया गया है। ज्यादातर परिवारों को जम्मू, एनसीआर और अन्य पड़ोसी राज्यों मे बसाया गया है।

पढ़ने के लिए क्लिक करें: Who will protect the rights of the Kashmiri Pandits

कश्मीरी हिंदुओं द्वारा 9 जनवरी 1990 को “पलायन दिवस” के रूप में बहुत दुःख के साथ याद किया जाता है।

1988  के मध्य से , जम्मू कश्मीर लिबरेशन फ्रंट (JKLF) ने कश्मीर में अलगाववादी आतंकवादी गतिविधियों को अंजाम देना शुरू किया।  

14 सितंबर 1989 को पहली बार एक कश्मीरी हिंदू को निशाना बनाया गया, जब JKLF ने  टीका लाल टपलू,, जो कि वकील और भारतीय जनता पार्टी के  एक प्रमुख नेता थे, उनकी कई चश्मदीद गवाहों के सामने हत्या कर दी।  यह करके कश्मीरी हिंदुओं में भय पैदा किया गया। टपलू के हत्यारे पकड़े नहीं गए और इस कारण  कश्मीरी हिंदुओं को लगा कि वे घाटी में आतंकवादियों के कारण सुरक्षित नहीं हैं और उन्हें किसी भी समय निशाने पर लिया जा सकता है।  इस बीच कश्मीरी हिंदुओं की हत्याएं जारी रहीं जिसमें कई प्रमुख व्यक्ति शामिल थे।

4 जनवरी 1990 को श्रीनगर स्थित समाचार पत्र आफताब ने एक संदेश जारी किया, जिसके माध्यम से आतंकवादी संगठन हिजबुल मुजाहिदीन ने सभी हिंदुओं को कश्मीर छोड़ने के लिए धमकी दी गई। सभी को धमकी भरे संदेश वाले पोस्टर भी दीवारें पर चिपकाय  गए  और सभी कश्मीरियों से कहा गया की वे इस्लामिक  नियमों का कठोरता से पालन करें।  उनसे कहा गया की अब वे इस्लामिक ड्रेस कोड का पालन करेंगे और शराब, सिनेमा पर पूरा प्रतिबंध रहेगा। वीडियो पार्लर और कश्मीरी महिलाओं पर सख्त प्रतिबंध भी लागु किये गए । पूरी तरह बहरी,अनजाने और नकाबपोश लोग एक-47 राइफल्स ले कर कश्मीर की सड़कों पर उन दिनों चलते थे और लोगों से कहते थे की वे अपनी घड़ियाँ पाकिस्तान समय के साथ मिला लें।  तभी सभी कार्यालय भवन, दुकानें, इस्लामिक शासन के प्रतिष्ठान के रूप में हरे रंग से रंग दिए गए।  दूसरी ओर, कश्मीरी हिंदुओं के कारखाने, मंदिर और घर जला दिए गए या नष्ट कर दिए गए । हिंदुओं के दरवाजों  पर धमकी भरे पोस्टर भी चिपका दिए गए  और उन्हें तुरंत कश्मीर छोड़ने के लिए भी कह दिया गया।

18 और 19 जनवरी को कश्मीर घाटी में एक ब्लैकआउट हुआ बिजली काट दी गई और कश्मीरी हिंदुओं को कश्मीर छोड़ने के लिए विभिन्न माध्यमों से भड़काऊ संदेश भेजे गए।

वर्ष 1990 में, जम्मू-कश्मीर और केंद्र सरकार दोनों ने घाटी से कश्मीरी पंडितों के नरसंहार और पलायन को चुपचाप देखा और देखते ही देखते लाखों कश्मीरी हिंदू अपने ही देश में शरणार्थी बन गए।

सनातन मिशन ने कश्मीरी हिन्दुओं द्वारा कश्मीर घाटी में उनके द्वारा छोड़ी गई उनकी तमाम संपत्ति उन्हें वापिस दिलवाने के लिए और उनके उचित पुनर्स्थापन की दिशा में कार्य करने का संकल्प लेकर एक राष्ट्रव्यापी अभियान शुरू किया है। इस उद्देश्य की पूर्ति के लिए सनातन मिशन की कश्मीरी पंडितों से अपील है  कि वे हमारा ऑनलाइन फॉर्म भर अपनी सहमति प्रदान करें।

दुपरांत, सनातन मिशन द्वारा, केंद्र और केंद्र शासित प्रदेश जम्मू कश्मीर की सरकारों के साथ उनका मामला उचित स्तर  पर उठाया जाएगा। अगर जरूरत पड़ी तो हम कानूनी उपाय भी तलाशेंगे और और आवश्यक हुआ तो मामला उच्चतम न्यायालय के स्तर पर भी उठाया जायेगा।  

सनातन मिशन का ऑनलाइन फॉर्म भरें